सैलाना : शासकीय महाविद्यालय में रक्तदान शिविर, विद्यार्थियों सहित 20 लोगों ने किया रक्तदान
Wednesday, October 7, 2026
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मानवता की सेवा में रक्तदान महादान,शासकीय महाविद्यालय में 20 यूनिट रक्तदान
सैलाना - भारतीय संस्कृति में दान की परंपरा का विशेष महत्व रहा है। अन्नदान, वस्त्रदान और विद्यादान जैसे अनेक दानों का हमारे ग्रंथों में उल्लेख मिलता है, लेकिन वर्तमान समय में रक्तदान को महादान कहा जाता है, क्योंकि किसी व्यक्ति द्वारा किया गया रक्तदान किसी जरूरतमंद का जीवन बचाने में सहायक बन सकता है।
इसी उद्देश्य को लेकर शासकीय महाविद्यालय सैलाना की युवा रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में विद्यार्थियों, पूर्व विद्यार्थियों, रासेयो स्वयंसेवकों, प्राध्यापकों एवं नगर के नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए कुल 20 यूनिट रक्तदान किया।
कार्यक्रम के अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर. पी. पाटीदार ने कहा कि अभी तक रक्त का कृत्रिम रूप से निर्माण संभव नहीं हो पाया है। आवश्यकता पड़ने पर मानव शरीर से ही रक्त प्राप्त किया जाता है। विज्ञान की प्रगति के साथ ब्लड बैंक की सुविधा उपलब्ध हुई है, जहां रक्त को सुरक्षित रखा जा सकता है और जरूरत के समय यह किसी के लिए संजीवनी का काम करता है। उन्होंने युवाओं से रक्तदान के प्रति जागरूक होकर इस पुनीत कार्य में आगे आने का आह्वान किया।
रक्तदान शिविर में महाविद्यालय के विद्यार्थी रामवीर ग्वाले, शौकीन मईड़ा, धीरज पाटीदार, कृष जोशी, राज पडियार, दर्शन राठौर, आर्यन पुरोहित एवं दीपक मईड़ा ने रक्तदान किया। वहीं पूर्व विद्यार्थी प्रवीण पडियार, आदित्य ग्वाले एवं अभिषेक चौहान, रासेयो स्वयंसेवक खुशी पाटीदार, राजपाल सिंह, मनीष साहू एवं केशव सांकला ने भी रक्तदान किया।
इसके अलावा प्राध्यापक डॉ. हरिओम अग्रवाल, रासेयो कार्यक्रम अधिकारी डॉ. रविकांत, ग्रंथपाल जयसिंह जाधव, सैलाना के व्यवसायी रोहित कोठारी एवं एकलव्य स्कूल के देवेंद्र कुमार ने भी रक्तदान कर मानवता की सेवा में योगदान दिया।
रेडक्रॉस प्रभारी प्रो. भूपेंद्र मंडलोई ने जानकारी देते हुए बताया कि शिविर में कुल 20 यूनिट रक्त एकत्रित हुआ। उन्होंने रक्तदान करने वाले सभी रक्तदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि रक्तदान के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है।
शिविर के सफल आयोजन में महाविद्यालय के डॉ. सौरभ ई. लाल, प्रो. अनुभा कानड़े, डॉ. बालकृष्ण चौहान, प्रो. भरत नागर, लक्ष्मण सिंह भंवर सहित संपूर्ण महाविद्यालय परिवार का सहयोग रहा।
रक्त संग्रहण एवं चिकित्सकीय व्यवस्था में शासकीय चिकित्सालय रतलाम की डॉ. कुदी तोमर, कमलेश यादव, महेंद्र जादव, गोवर्धन बघेल, भेरूलाल मचार एवं जितेंद्र दास बैरागी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।