आलीराजपुर : संघ शताब्दी वर्ष पर आयोजित हिंदू सम्मेलन, एकता और सेवा का आह्वान
Monday, January 12, 2026
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संवाददाता:- वैभव जाधव
अलीराजपुर- संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर आलीराजपुर जिले के हरसवाट, बड़ा उंडवा, बोरकुआ, सोरवा व चाँदपुर मे कट्ठीवाड़ा खण्ड के आमखुट, जोबट खण्ड के खट्टाली व च॰ शे॰ आजाद खण्ड के सेजवाड़ा मंडलो पर भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के शुरुआत में अतिथियों द्वारा भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्वलन कर विधिवत कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। अंत में भारत माता की आरती के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।
8 मंडलो मे संत एवं मुख्य वक्ता के रूप मे संत श्री
घनश्यामदासजी, अनिल जी ओक, जुवानसिंह जी, धर्मेन्द्र चौधरी (रिटायर्ड IPS अधिकारी), निजानन्द गिरी महाराज, बबीता जी, राधा ससतिया, राजेंद्र टवली, ईश्वर सिंह डावर, आरती दीदी, पुष्पलता दीदी, राजू महाराज, ईश्वर बृजवासी का बौद्धिक प्राप्त हुआ |
कार्यक्रम में मंचासीन अतिथियों में ग्राम के पटेल, पुजारा भी उपस्थित रहे |
मुख्य वक्ता श्री अनिल ओक ने संबोधित करते हुए कहा कि आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुका है। इस अवसर पर देशभर में हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय तक परतंत्र रहा, जिसका कारण आपसी भेदभाव, जातिवाद और समाज में बिखराव था। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने युवाओं के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की, जो आज वटवृक्ष का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि एक समय था जब हिंदू कहलाने में संकोच होता था, आज वही समाज गर्व के साथ स्वयं को हिंदू कहता है। कठिन तपस्या, त्याग और सेवा भाव के कारण आज हिंदू समाज संगठित हुआ है। देशभर में 80 हजार से अधिक शाखाएं संचालित हो रही हैं। प्राकृतिक आपदा हो या मानव निर्मित संकट, संघ के स्वयंसेवक सदैव सबसे पहले सेवा कार्य में आगे रहते हैं। श्री जुवानसिंह जी ने जनजातीय समाज की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह क्षेत्र स्वाभिमानी जनजातीय समाज का रहा है, जिसने सदैव समाज और राष्ट्र के लिए योगदान दिया है। रामायण काल में वनवासी समाज ने भगवान श्रीराम के साथ रहकर धर्मयुद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भगवान श्रीराम का त्याग, मर्यादा और वनवासी जीवन आज भी प्रेरणा देता है। लेकिन आज जनजातीय समाज को सेवा के नाम पर लोभ-लालच और प्रलोभन देकर उनका मतांतरण किया जा रहा लेकिन उनको नही भुलना चाहिए कि उनके पूर्वज हिन्दु हैं। जो कभी सफल नही होंगे। उन्होंने गुरु गोविंद सिंह के चारों साहिबजादों के बलिदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए, लेकिन धर्म परिवर्तन स्वीकार नहीं किया। यही हमारी संस्कृति की शक्ति है, जो सबको जोड़ने वाली है। राम भारत की आत्मा हैं। मुख्य वक्ता ने कहा कि आज भी विदेशी शक्तियां ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपनाकर देश को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। ऐसे समय में समाज को एक परिवार की तरह संगठित रहना आवश्यक है। देश की आजादी में संपूर्ण समाज का योगदान रहा है। नर सेवा ही नारायण सेवा है और सनातन धर्म का मूल भाव दया, करुणा, सेवा और शांति है। उन्होंने मातृशक्ति को दया और करुणा की मूर्ति बताते हुए कहा कि आवश्यकता पड़ने पर वही काली का रूप भी धारण करती है। संघ की शाखाओं में तन, मन और जीवन समर्पण की भावना सिखाई जाती है। गंगा माता, तुलसी माता, गीता माता और भारत माता के प्रति निष्ठा बनाए रखना हम सभी का कर्तव्य है। श्री ओक ने शताब्दी वर्ष के संदेश के रूप में नागरिक कर्तव्य, कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, स्व का बोध और पर्यावरण संरक्षण इन पांच विषयों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आने वाला समय भारत का है, भारत पुनः विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर है और विश्व को मार्गदर्शन करेगा। कार्यक्रम के अंत मे सभी ने राष्ट्रभक्ति का संकल्प लिया और समरसता भोज के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ |