सैलाना : हिंदी हमारी संस्कृति और भावनात्मक एकता की महत्वपूर्ण कड़ी : डॉ. आर. पी. पाटीदार

सैलाना : हिंदी हमारी संस्कृति और भावनात्मक एकता की महत्वपूर्ण कड़ी : डॉ. आर. पी. पाटीदार

रतलाम डेस्क

सैलाना - शासकीय महाविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के तत्वावधान में हिंदी दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में हिंदी भाषा के प्रति प्रेम, सम्मान एवं जागरूकता की भावना विकसित करना रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य एवं संरक्षक डॉ. आर. पी. पाटीदार ने की। अपने उद्बोधन में उन्होंने विद्यार्थियों को हिंदी के प्रति सम्मान एवं गौरव की भावना विकसित करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति एवं हमारी भावनात्मक एकता को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. भरत लाल नागर ने हिंदी भाषा के उद्भव एवं विकास पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हिंदी भाषा का विकास वैदिक संस्कृत → लौकिक संस्कृत → पाली → प्राकृत → अपभ्रंश → हिंदी की क्रमिक भाषायी विकास-यात्रा से हुआ है।

प्रो. नागर ने हिंदी की प्रमुख बोलियों के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि हिंदी क्षेत्र में खड़ी बोली, ब्रजभाषा, हरियाणवी (बांगरू), बुंदेली, कन्नौजी, अवधी, बघेली, छत्तीसगढ़ी, मारवाड़ी, मेवाती, जयपुरी/ढूंढाड़ी, मालवी, भोजपुरी, मगही, मैथिली, कुमाऊँनी-गढ़वाली एवं मध्यवर्ती पहाड़ी जैसी प्रमुख बोलियाँ प्रचलित हैं। उन्होंने कहा कि इन बोलियों ने हिंदी भाषा को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

 14 सितंबर 1949 को हिंदी को संघ की राजभाषा घोषित किया गया।
 14 सितंबर 1953 को पहला हिंदी दिवस मनाया गया।

उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 का उल्लेख करते हुए बताया कि संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग के साथ-साथ हिंदी साहित्य एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन के लिए भी प्रेरित किया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. हरिओम अग्रवाल ने किया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. अशोक रावत ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रो. भूपेंद्र मंडलोई, प्रो. कविता चौधरी, प्रो. रविकांत सहित महाविद्यालय के प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

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