महिला आरक्षण और भारत में प्रतिनिधित्व: एक नई दिशा

महिला आरक्षण और भारत में प्रतिनिधित्व: एक नई दिशा

इंदौर डेस्क

डॉ. समीक्षा नायक
 
इंदौर-साल 2023 में महिलाओं के लिए आरक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण कानून पारित हुआ, जिसे अनुच्छेद 334A के संदर्भ में देखा जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना है, ताकि निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी समान हिस्सेदारी सुनिश्चित हो सके। वर्तमान में भारत में महिला सांसदों की संख्या लगभग 14% है, जो वैश्विक औसत 27% से काफी कम है। यह अंतर स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भारतीय राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी सीमित है। ऐसे में यह कानून एक सकारात्मक और आवश्यक कदम माना जा रहा है। हालांकि, इस आरक्षण को तुरंत लागू नहीं किया जाएगा। ये पहले से तय है कि पहले जनगणना फिर परिसीमन होगा और उसके आधार पर तय होगा कि कितनी सीट्स पर महिला प्रतिनिधि होगी और तब जाकर यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू होगी। इस पूरी प्रक्रिया में समय लग सकता है, इसलिए इसमें संशोधन लाया गया क्यूंकि पहले ही ये 27 साल देरी से होने वाला निर्णय है जिसकी वर्तमान भारत को आवश्यकता है l पहले भी 1996 और 2010 में महिला आरक्षण विधेयक लाने की कोशिशें हुईं, लेकिन सफलता नहीं मिलीl 2023 में इसका पारित होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो लंबे इंतजार के बाद संभव हो पाया है। कुल मिलाकर, यह पहल महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो यह भारतीय लोकतंत्र को अधिक समावेशी और संतुलित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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